Monday, 19 October 2026

कानून का राज हो, अन्याय का अंत हो - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

कानून का राज हो, अन्याय का अंत हो - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

कलम उठी तो सच लिखेगी, झूठ से न घबराएगी,
अन्यायों के अंधकार में, न्याय-ज्योति जलाएगी।
लोकतंत्र की पावन धरती पर, कानून का सम्मान हो,
सत्ता हो जनसेवा का साधन, जनहित ही प्रधान हो।
जो गैरकानूनी राह चुनेगा, उसका सच उजागर होगा,
जो अवैधता को पोषित करेगा, वह जन-प्रश्नों के घेरे में होगा।
नाजायज हर कृत्य पर उठे, जनचेतना की आवाज़,
कानून-विरुद्ध कर्मों का टूटे, अन्यायपूर्ण हर ताज।
सरकारों का धर्म यही है, जनता का विश्वास रहे,
नियमों की मर्यादा में ही, हर निर्णय का वास रहे।
अनधिकृत अधिकारों की सीमा, कोई लाँघ न पाए,
अवैधानिक आदेशों पर, संविधान प्रश्न उठाए।
प्रतिबंधित हों वे कृत्य सभी, जो मानवता को छलते हैं,
आपराधिक मन के इरादे, समाज में विष घोलते हैं।
कानून किसी का दास नहीं, न ऊँचे पद का मान,
न्याय की चौखट पर एक समान, हो हर व्यक्ति की पहचान।
लोकतंत्र केवल शब्द नहीं, जन-जन का अधिकार है,
निर्भय होकर सच कह पाना, इसका मूल विचार है।
सरकारें आएँ, सरकारें जाएँ, संविधान अमर रहे,
न्याय, सत्य और जनकल्याण का, उज्ज्वल ध्वज लहराए।
मेरी कलम न बिकने वाली, न झुकने वाली शान है,
अन्याय के विरुद्ध उठी, यह जनता की जुबान है।
अवैधता के हर अँधेरे को, सत्य से मिटाना है,
कानून के शासन से ही, सुंदर राष्ट्र बनाना है।
कलम मेरी पहचान बने, सच मेरा अभिमान,
न्याय, समानता, बंधुत्व से, ऊँचा हो हिंदुस्तान।
लोकतंत्र की रक्षा करना, हर नागरिक का काम,
संविधान की राह पर चलकर, रोशन हो देश का नाम।

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab 

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