Sunday, 4 October 2026

लोकतंत्र का प्रहरी - डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई


 
लोकतंत्र का प्रहरी - डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई 

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चुनाव आयोग बने प्रहरी, लोकतंत्र की शान,
 निष्पक्षता की राह दिखाए, रखे देश का मान।
 मुख्य निर्वाचन आयुक्त की दृष्टि रहे सजग-साकार,
 हर मतदाता के अधिकारों का हो पूर्ण सत्कार।
मतदाता सूची शुद्ध रहे, हर योग्य नाम का मान,
 नामांकन की हर प्रक्रिया में हो स्पष्ट विधान।
 न धन का दबाव, न छल-कपट, न कोई धांधली,
 मत की कीमत समझे जनता—यही लोकतंत्र की लाली।
पारदर्शिता की उजली किरण हर चरण में साथ रहे,
 मतदान-कक्ष में निर्भय होकर मतदाता अपना मत दे।
 न भय किसी का, न प्रलोभन हो, न दबाव की दीवार,
 एक-एक मत में छिपा हुआ है जनादेश अपार।
आदर्श आचार-संहिता बने मर्यादा की रेखा,
 सत्ता हो या विपक्ष—नियमों का हो लेखा।
 जाति-धर्म की दीवारों से ऊपर उठे विचार,
 नीति, कर्म और जनहित पर हो मतदाता का अधिकार।
मतगणना हो निष्पक्ष, स्पष्ट, विश्वसनीय,
 हर चरण का सत्य रहे जनता के लिए दृश्यनीय।
 शंका यदि उठे कहीं, तो तथ्य बने आधार,
 विश्वास और पारदर्शिता से सुदृढ़ हो लोकतंत्र का द्वार।
न मेरा मत बिके कभी, न मेरा अधिकार झुके,
 मेरी उँगली की स्याही से भविष्य के दीप जले।
 मत केवल निशान नहीं—जनता की आवाज़ है,
हर जागरूक मतदाता ही लोकतंत्र का प्रहरी आज है।

डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई 
बेंगलूरु 
कर्नाटक

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