UPI-भुगतान का नया दौर - डॉ.नेहा बागड़ी
न नोटों का झंझट, न सिक्कों का शोर,
एक छोटे से फोन ने बदल दिया, लेन-देन का दौर।
पहले जेब टटोलते थे, खुले पैसों के लिए,
अब एक क्लिक में काम होता, सेकंडों के लिए।
ठेले वाले भैया के पास भी, अब QR लगा है,
रिक्शे वाले से लेकर, मॉल तक यही नशा है।
सब्जी लेनी हो या, चाय का उधार,
"भैया PhonePe कर दिया" खत्म हुई तकरार।
माँ गाँव से बेटे को, पल में पैसे भेजती है,
बेटी की फीस भरने में, अब देर नहीं लगती है।
न बैंक की लंबी लाइन, न किसी का इंतजार,
अपने ही फोन में है, अपना पूरा बाजार।
पाँच रुपए हो, या फिर हो पाँच हजार,
पेमेंट हो गया है , जी भईया आपका बहुत-बहुत आभार।
युवा हो या फिर हो बुजुर्ग,
इसका भुगतान करते है सब यूजर्स।
गाँव-गाँव तक पहुंचा है, डिजिटल का ये प्रकाश ,
भारत के लोगों को पेमेंट करने का, नया हुआ एहसास ।
ये है UPI, ये नयी रीत है,
इसी ने दिलाई समय पर जीत।
ये सिर्फ पैसा नहीं है, ये वक्त की पहचान है,
ये भरोसे का नाम है, ये हिंदुस्तान की शान है
UPI नहीं, ये तो अपनेपन का एहसास है,
जेब में इसे रखे हुए , भारत देश का हर शख्स है।
डॉ.नेहा बागड़ी, भिवानी (हरियाणा) (Dr.Neha Bagri)

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