लोकतंत्र की स्याही - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"
कलम मेरी पहचान बने,
सच की सदा आवाज़ बने,
लोकतंत्र के इस पर्व में,
हर मतदाता सरताज बने।
चुनाव नहीं बस नामांकन,
यह जनमन का अधिकार है,
हर एक मत की अपनी कीमत,
हर मत में जन-आधार है।
निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी,
निष्पक्ष रहे हर निर्णय,
आदर्श आचार संहिता बोले—
सबके लिए हो एक नियम।
न धन का लोभ, न झूठे वादे,
न भय का कोई राज रहे,
जनता अपने विवेक से चुने,
सच्चाई का ही ताज रहे।
मतदान केंद्र तक कदम बढ़ें,
उंगली पर स्याही मुस्काए,
जाति-धर्म से ऊपर उठकर,
भारत अपना मत दे पाए।
मतगणना जब निष्पक्ष होगी,
विश्वास तभी मजबूत बने,
पारदर्शिता के उजले दीपक
हर संशय को दूर करें।
धांधली की हर राह रुके,
ईमानदारी पहरेदार बने,
मुख्य निर्वाचन आयुक्त से लेकर
हर कर्मी जिम्मेदार बने।
न कोई वोट व्यर्थ हो जाए,
न कोई अधिकार छिन पाए,
लोकतंत्र की पावन धरती पर
जन-विश्वास सदा खिलखिलाए।
मेरी कलम यही लिखती है—
मत की गरिमा कम न हो,
भारत के लोकतंत्र की लौ
कभी किसी मौसम में नम न हो।
स्याही छोटी-सी उंगली पर,
अधिकार बहुत महान,
एक-एक मत से बनता है
भारत का भविष्य और विधान।
मेरी कलम मेरी पहचान,
मेरा मत मेरी आवाज़—
जागरूक मतदाता ही रखता,
लोकतंत्र का मान-सम्मान।
डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab

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