सरकार सत्ता का सत्यार्थ - नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
सरकार का स्पष्ट अर्थ है आम जनता से सरोकार सरकार मे सत्ता शक्ति भाव नहीं बल्कि सेवा भाव निहित होता है!
शासन शासक कि अवधरणा का मतलब यह नहीं होता कि प्राप्त शासकीय संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग उपयोग दुरपयोग सिर्फ व्यक्तिगत पारिवारिक या सामयिक संतुष्टि के लिए करना!
#भगवान राम से अनुज लक्ष्मण ने प्रश्न किया ज़ब आप स्वंय भिज्ञ है कि माता सीता निर्मल गंगा कि तरह पवित्र है तो,तो फिर राज्य के धोबी कि बात पर माता सीता को वन क्यों भेज दिया!#
#तब मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने अनुज को राज धर्म बताते हुए कहा था कि राजा या शासक का अपना कुछ नहीं होता उसके पास जो भी उपलब्ध है वह सिर्फ और सिर्फ जनता का है जनता के लिए है उसकी अपनी कोई इच्छा नहीं होती जनता कि इच्छा ही उसकी इच्छा होती है!#
सरकार का मुखिया ईश्वर का प्रतिनिधि एवं आम जनता कि आकांक्षाओं का यथार्थ होता है शासन का पहला सिद्धांत है
सर्वें भवन्तु सुखिनः शासन सत्ता के अंतर्गत आने वाले सभी जीव जंन्तु मनुष्य अर्थात प्राणी मात्र संतुष्ट रहे!
दूसरा सिद्धांत है अनुशासन अर्थात किसी सक्षम शक्तिमान द्वारा किसी भी अबला, दुर्बल, पर अत्याचार ना किया जाय यह सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है!
सरकार को भेद भाव से परे निरपेक्ष भाव से सर्वहिताय सर्व सुखाय अपने दायित्व का निर्वहन करे सभी मत विचार धमो का सम्मान एवं सम भाव सत्ता सरकार शासन का प्राण है!
राजशाही प्रथा मे पारंपरिक पारिवारिक सत्ता सरकार के कारण राज परिवारों मे ही बगावत के स्वर फूटने लगते और सत्ता के लिए छल,छद्म,धोखा, फरेब,झूठ आदि का खेल शुरू होता और पारिवारिक कलह से बाहर निकल एक नव सरकार सत्ता जन्म लेती तब बुर्जआ वर्ग को शांति मीलती!
लोकतंत्र मे ऐसी स्थिति नहीं आती फिर भी बुर्जुआ वर्ग कभी कभी शासन कि अराजकता भ्रष्टाचार आतंक से अब जाता है लोक तंत्र मे यह स्थिति तब आती है ज़ब चुनी सरकार का मुखिया
अहंकारी मदांध हो तानाशाह हो अनैतिक, अमर्यादित होकर विचार व्यवहार से अंधा हो जाता है तब स्थिति और बिगड जाती है ज़ब सरकार का हर अवयव अपने भ्रष्ट आतंक के पर्याय मुखिया कि भाषा बोलने लगता है
तब जन्म लेती है बगावत सड़को पर आम जनता का आक्रोश
अतः सरकार को संतुलित, सांयमित, पारदर्शी, निरपेक्ष, सम्भाव, नैतिकता बोध एवं मर्यादित सौम्य विनम्र शासन सरकार कि वैधानिक व्यवहारिक लोक प्रिय सरकार कि वास्तविकता है!!
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
गोरखपुर
उत्तर प्रदेश!!

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