Tuesday, 20 October 2026

अनधिकृत - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ

अनधिकृत - वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ
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 अनधिकृत  कार्यों से सही में 
   समाज में अंधकार छा जाता है 
    नियमों   को    जो    तोड़ता   है 
     वह   संकटों    से    घिर जाता है 

बिना अनुमति कदम उठाना 
  उचित    नहीं   कहलाता  है 
   अधिकारों की  सीमा लांघना
      विवाद    नया    बनाता   है 

 कानून की मर्यादा में 
   हर व्यक्ति को रहना है 
     अपने कर्तव्य को निभाकर 
        सच्चाई  के  संग  चलना है 

अनधिकृत कब्जा हो या 
    पद का दुरुपयोग कहीं 
      ऐसे अनुचित कर्मों से 
         सुख शांति रहती नहीं 

बिना इजाजत प्रवेश करना 
   निजता   का   अपमान  है 
      दूसरों  के  हक को छिनना 
        मानवता   का   अपमान  है 

अनुमति लेकर काम करें 
   यही सभ्यता का शान  है 
      नियमों का जरूर सम्मान करें 
        इससे बढ़ता देश का अरमान है 

 अनधिकृत धन की चाह में 
    कभी   मत   खोना  इंसान 
       छानिक  लाभ  के  लोभ में 
          मत करना खुद का नुकसान 

 अधिकार वही उचित है 
   जो कर्तव्य से जुड़ जाता है
      न्याय    और   सदाचार‌   से 
         जीवन  सुंदर  बन  जाता  है

 आओ मिलकर शपथ करें 
    नियमों  का  मान   बढ़ाएं
      अनधिकृत  कार्य छोड़कर 
          सद्भाव  के  दीप  जलाएं 

कहते हैं “कवि सुरेश कंठ”
   गलत  कभी  नहीं  करना है 
       करना  है  सोच समझकर 
          जो  सही  मन  में आना है
    —-----    जयहिंद  —------
रचयिता :- काव्य शिरोमणि 
        वरिष्ठ कवि सुरेश कंठ 
           बथनाहा, अररिया 
                  बिहार।

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