Wednesday, 14 October 2026

योग आध्यात्मिक साधना - संगीता अहलावत

योग आध्यात्मिक साधना - संगीता अहलावत 

प्राचीन काल से ही योग आध्यात्मिक साधना का माध्यम रहा है l योग का जनक महर्षि पतंजलि को माना जाता है l योग की परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है l ऋषि मुनियों ने घोर तपस्या से योग का ज्ञान प्राप्त किया है l वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता तथा अन्य भारतीय ग्रंथों में भी योग का उल्लेख मिलता है l 

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में 21 जून को " अंतरराष्ट्रीय योग दिवस" घोषित किया l यह भारत के लिए गौरव की बात है कि उसके प्रयासों से योग को वैश्विक सम्मान मिला l 

योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करती है l योग व्यक्ति के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करता है l इससे हमें आत्मानुशासन , आत्मसंयम और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है l योग से व्यक्ति अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण करना सिखाता है l योग मनुष्य को स्वयं से, समाज से, प्रकृति से परमात्मा से जोड़ने का कार्य करता है l योग केवल शरीर को स्वस्थ ही नहीं बनाता बल्कि मन को शांत, बुद्धि को स्थिर और आत्मा को जागृत करता है l योग शरीर को स्वस्थ और सुदृढ़ बनाने का सबसे सरल और प्रभावी साधन है l नियमित योगाभ्यास करने से अनेक रोगों से बचा जा सकता है l नियमित योगाभ्यास से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग तथा पाचन संबंधी समस्याओं से फायदा मिलता है l योग से शरीर में लचीलापन आता है l व्यक्ति के शरीर में ऊर्जा का संचार होता है l

योग मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखता है l योग के अभ्यास से व्यक्ति का ध्यान केंद्रित रहता है l योग व्यक्ति को अपने क्रोध, ईर्ष्या, भय पर नियंत्रण करना सिखाता है l योग मन में सकारात्मक विचारों का विकास करता है l इससे व्यक्ति जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य और आत्मविश्वास से कर पाता है l 

अंत में "योग स्वस्थ जीवन का आधार है इसी से चलता सबका सुगम संसार है"l

       - संगीता अहलावत
उत्तर प्रदेश 

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