अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु
आजादी - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर
हमारा देश जो कभी
सोने की चिड़िया था
उस देश में सोना लेना
एक सपना सा हो गया है ।
देश के सोने को
अंग्रेज लूट ले गये
बचा खुचा देश में
कौन हड़प कर गये ।
आप क्या जान गये
देश की आजादी को
कितने दशक हो गये ।
परंतु गुलामी आज भी
गली मोहल्ले चौराहे में
देश में पैर जमाकर बैठी है।
देश में कानून है
कोई मानता ही नही
संविधान है कोई
पढ़ता ही नही ।
अदालतों में न्याय की जगह
बस तारीख पर तारीख ही
आम आदमी को मिलती है ।
बड़े जजों के बंगले में बोलो से
भरे नोटों के जले बंडल मिलते हैं ।
मां बहिन बेटियों
की इज्जत सरेआम
चौराहों मे लुटती है ।
न्याय पाना ख्वाब
सा हो गया है ।
बस तारीख पर
तारीख ही मिलती है ।
सबूत और गवाहों
के चक्कर मे कचहरी
चलती रहती है।
भ्रष्टाचार आतंकवाद
भाई भतीजावाद ।
मंहगाई मिलावट
यही तो है हमारे
देश का समाजवाद।
एक अमीर है
अमीर होता जा रहा है
एक गरीब है
गरीब होता जा रहा है
आरक्षण देकर भाई से
भाई को बाटा जा रहा है ।
जातियों के नाम पर
गरीबी का पैमाना
देखा जा रहा है ।
आरक्षण एस सी एस टी एक्ट
यू जी सी कानून बनाकर
सवर्णों के बच्चों को
अपराधी बनाने की साज़िश
में फंसाने का कानून बना है ।
इन कानूनों के विरूद्ध
सवर्ण आन्दोलन कर रहे है ।
बोट बैंक के खातिर प्रधानमंत्री
सवर्णों से पक्षपात कर रहे हैं ।
प्रदूषण पर्यावरण
के नाम से करोडों
रूपया खर्च हो रहा है
इसी पैसों मे भ्रष्टाचार
पनपता है बढता है
रेवड़ी की तरह बटता है ।
गंगा की सफाई के
नाम से पैसा निकलता है
बरसात में पानी की बाढ
की तरह साफ हो जाता है।
प्राइवेट स्कूल कालेजों
अस्पतालों में लूट मची है
किसी की पढ़ाई बीमारी से
कोई लेना देना नही है
मनमानी पैसों की लूट मची है।
आरक्षण वाले माइनस
40 नंबर में डाक्टर बन रहे हैं।
आरक्षण वाले नौकरी में
प्रमोशन में आरक्षण पा रहे हैं।
कलेक्टर एस सांसद विधायक
भी आरक्षण का फायदा ले रहे है
स्वच्छता अभियान चलता है
नालिया बजबजाती है
झाडू लेकर नेताओ
की फोटो खिचती है ।
बीच बाजार चौराहों में
सुअर कुत्ते लावारिस
जानवर ज्यादा दिखते है।
यही तो देश कीआजादी है
जो गली मोहल्ला शहर गांव
के चौराहो मे दिखती है ।
यही तो हमारे देश आजादी है
देश में गणतंत्र है लोकतंत्र
यहां हर देशवासी
आजाद है स्वातंत्र है ।
महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
जबलपुर म प्र /

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