Sunday, 1 November 2026

किसान की बेटी: मिट्टी की पुकार - कल्याणी शंकर दुधबले

 किसान की बेटी: मिट्टी की पुकार - कल्याणी शंकर दुधबले

मैं एक सीधे-साधे किसान की बेटी हूँ, और रोज़ अपने पिता का वो गहरा दुख देखती हूँ,
जब वो पसीने से सींची धरती पर, कंक्रीट और कचरे का यह बढ़ता हुजूम देखती हूँ।
जिस माटी से मेरे पिता ने हम सबको पाला, आज वो ज़हरीली हो रही है,
बदलते पर्यावरण और सूखी फसलों को देख, उनकी आँखें रातों को सोती नहीं हैं।
वो दिन-रात खेतों में खटकर, अन्न से सबका पेट भरते हैं,
पर इंसानों की इस लापरवाही से, वो अपने बच्चों के भविष्य की चिंता करते हैं।
खेतों की मेढ़ों और नदियों के किनारे, जो प्लास्टिक का अंबार लग रहा है,
उसी सिंगल-यूज की जानलेवा लत से, मेरे पिता का हर सपना बिखर रहा है।
फसलों को निगलते इस प्लास्टिक पर, अब करारा वार करना होगा,
सरकार के इस पूर्ण प्रतिबंध को, हम सबको मिलकर स्वीकार करना होगा।
यह लड़ाई सिर्फ कागज़ों पर नहीं, हमें खेतों और गलियों तक ले जानी है,
देश के हर एक नागरिक को इसमें, अपनी सक्रिय भागीदारी निभानी है।
मेरे अन्नदाता पिता की मेहनत और इस पावन प्रकृति का, हमें मिलकर संरक्षण करना है,
तभी इस झुलसती हुई सुंदर धरा में, फिर से खुशहाली का नया रंग भरना है।
मिट्टी को बंजर होने से बचाना, यह केवल किसी एक का काम नहीं, हम सबकी है ज़िम्मेदारी,
तभी थमेगी प्रदूषण और विनाश की, यह चुपचाप पैर पसारती बीमारी।
हवा, अमृत नीर और खेतों की माटी की, समय रहते कर लो सुरक्षा,
किसान के आंसुओं को पोंछकर, आज कर लो इस पूरी कायनात की रक्षा।
उठो! एक किसान की बेटी की आवाज़ सुनो, एक नया संकल्प सजाना है,
प्लास्टिक मुक्त इस पावन धरा को, फिर से सोने की चिड़िया बनाना है

Name : Kalyani Dudhbade
कल्याणी शंकर दुधबले

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