Tuesday, 30 December 2025

भारत - अलका जैन आनंदी

भारत - अलका जैन आनंदी

1 भारी कीमत कर अदा,भारत करता नाज।
हो कुर्बान वीरों ने, दिया आराम आज।।
दिया आराम आज,मुह गद्दार का काला।
खुश हैं भारत लोग,चाय का पीते प्याला।।
फहराते जन शान,आम या हो सरकारी।
विश्व पटल पर धूम,दिखे हैं मस्ती भारी।।

 भारत की संसार में,बनी अलग पहचान।
सीना ताने वीर हैं,देते सब है मान।।
देते सब है मान,तिरंगा नभ में जाए।
जय जय करे जवान, यहीं सब  मिलके गाए।।
अपना महान देश,नमन हो वीर शहादत।
अलका तन-मन वार,गर्व है मुझको भारत।।

भारत अपने देश पर,हमको होता नाज।
सैनिक देते जान है,रख आजादी लाज।।
रख आजादी लाज,अलग है सब का खाना।
एक सदा संदेश,एकता प्रेम खजाना।।
अलग सभी के वस्त्र,मरो गद्दारो लानत।
अलका सच्चे वीर,खुशी दे उनको भारत।।

अलका जैन आनंदी
स्वरचित, दिल्ली

रोजगार - अरुण दिव्यांश


हमारी वाणी
विषय : रोजगार - अरुण दिव्यांश

दिवा : शुक्रवार
रोजी रोटी की अहम् समस्या ,
चाहे नौकरी या रोजगार मिले ।
कर सकें परिवार का पालन ,
मेरे पेट को भी वह प्यार मिले ।।
सबको अपना जीवन प्यारा ,
सबको जीने का आधार मिले ।
जीने हेतु तो करना है भोजन ,
सबको भरपेट ये आहार मिले ।।
नौकरी सरकारी हो या निजी ,
या कोई भी तो रोजगार मिले ।
खुशहाल हो सबका जीवन ,
खुशमय सबका संसार खिले ।।
भरपाई हो महंगाई फैशन का ,
टूटते रहें इसके हर बार किले ।
करते रहें हम संघर्ष आजीवन ,
महंगाई फैशन ये जड़ से हिले ।।
हल हो जाए रोजी की समस्या ,
जीवन जीने का यह सार मिले ।
जीवन भोजन दिया है जिसने ,
उसको हृदय से आभार मिले ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना

अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

रोजगार - महाकवि डां अनन्तराम चौबे अनन्त

राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 

साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
विषय...रोजगार - महाकवि डां अनन्तराम चौबे अनन्त

एक पढा लिखा बेरोजगार युवक
रोजगार ढूंढते ढूंढते हो गया परेशान ।

जाति से ब्राह्मण होने के 
अभिशाप से था हैरान ।
नेताओ के निजी स्वार्थ ने 
आरक्षण कोटे से किया परेशान।

आरक्षण इतना बढ़ा दिया है
कि ब्राह्मणों को नोकरी मिलना
आज के वर्तमान समय में 
बहुत ही मुश्किल हो गया है।

जाति में ब्राह्मण होने का
एक फायदा जरुर हुआ ।
जन्म जात ज्ञानी और
बुद्धि में बहुत ही तेज था ।

सारा सच पैसों की कमी और
बेरोजगारी से परेशान था । 
घर में माता पिता पर बोझ से
दिनों दिन बहुत ही हैरान था ।

सच कहूं अचानक मन में 
एक युक्ति समझ में आई ।
रोज सुबह से शमशान घाट में 
सारा सच मिट्टी में शामिल होने की 
बात अचानक ही मन में आई ।


और शहर से आने वाली 
शवयात्रा मिट्टी में प्रतिदिन
सारा सच सुबह से दोपहर के बीच 
शवयात्रा में शामिल होने लगा ।

आजकल शव यात्रा में
शामिल होने वालों को
एक किताब दी जाती है ।
अपना नाम पता लिखने 
की बात कही जाती है ।

उस युवक ने भी किताब में 
अपने नाम पते में शमशान घाट
के पहले झोपडी लिखा दिया ।
अपनी झोपडी में राम नाम 
सत्य है का बोर्ड लगवा दिया ।

तेरहवीं में खाने के साथ 
एक सौ एक रुपया दक्षिणा 
देना भी लिखवा दिया ।
अचानक दस बारह दिनों के
बाद एक जजमान झोपडी में
आकर तेरहवीं में आने का 
कार्ड देकर  आग्रह किया ।

बेरोजगार युवक जजमान 
के घर तेरहवीं खाने गया ।
खाने के बाद एक सौ एक रुपया 
नगद  गिलास सामग्री पा गया ।

इस तरह युवक अब रोज एक 
दो तेरहवीं में शामिल होने लगा ।
क्योंकि रोज, रोजी रोटी का
अच्छा इन्तजार जो हो गया ।

एक दिन युवक ने जजमानों से
विनम्रता पूर्वक आग्रह किया।
मैं बेरोजगार हूं  ऐसा मत
अपने फायदे के लिए बताया ।


मैं बेरोजगार जाति का ब्राह्मण हूं 
दक्षिणा में दान सामग्री तो दीजिए।
दान सामग्री बहुत इकट्ठा हो गई है
इच्छानुसार नगद पैसा दे दीजिए ।

जजमानों को युवक की 
यह बात भी पसंद आई ।

दूसरे दिन युवक जजमान के घर
तेरहवीं में पेट भर खाना खाया।
बाद तीन सौ एक रुपया पाकर 
मन ही मन बहुत ही हर्षाया ।

इस तरह ब्राह्मण युवक का 
यही क्रम प्रतिदिन चलने लगा ।
सुबह से एक दो शव यात्रा में 
प्रतिदिन शामिल होने लगा ।

दोपहर में नहाने धोने के बाद 
ब्राह्मण भोज में  जाने लगा।
इस तरह धर्म के साथ अपना
ब्राह्मण कर्म भी करने लगा ।

इसी तरह अपने दो चार ब्राह्मण
मित्रों को भी शामिल कर लिया । 
पेट भर खाना, खर्च को पैसों का
फायदा भी प्रतिदिन मिलने लगा ।

सारा सच दक्षिणा की रकम से घर 
परिवार का खर्च चलने लगा ।
अपने ब्राह्मण जाति धर्म से
समाज में सम्मान मिलने लगा ।

और इस तरह मुक्ति धाम में ही 
बेरोजगारी से मुक्ति पा गया ।

हमारे देश में इस तरह लाखों
बेरोजगार , रोजगार घूम रहे हैं ।
माता पिता के कंधों पर बोझ 
बनकर आत्म ग्लानि से जी रहे हैं ।
       
 महाकवि डां अनन्तराम चौबे अनन्त
  जबलपुर म प्र

परिवर्तन - छाया त्रिपाठी

सादर प्रेषित एक कविता      
परिवर्तन - छाया त्रिपाठी 

 पर रखना होगा थोड़ा संयम

होता परिवर्तित दिन महीना साल 
 एक उम्र के साथ बदल जाती चाल 

समय के साथ कुछ खोते कुछ पा लेते 
 अपने बिछड़ जाते तो पराए अपना लेते 

 इच्छा हो यदि सबका साथ मिले 
 त्याग दे पहले सभी अपने उलाहने 

 समय से पहले कुछ मिला नहीं 
आधा अधूरा कभी पूरा नहीं 

 जरूरी है नई दिशा नई सोच 
एक सकारात्मक कर्तव्य निष्ठा 

 कुछ नया करने की तीव्र इच्छा 
सभी लोगों की सहमति  व ज्ञान 

रखना होगा सभी का सम्मान 
 और फिर परिवर्तन स्वयं आएगा।

छाया त्रिपाठी ✍️
स्व रचित एवं मौलिक

विकसित भारत - पदमा तिवारी

विकसित भारत - पदमा तिवारी

आओ मिलकर संकल्प सभी लें, 
हमें विकसित भारत बनाना है। 
जो डाले इस पर कुदृष्टि,
दृष्टि हीन उसे बनाना है।।

मत बनो पर पराबलंबी,
स्वावलंबी बन हमें दिखाना है। 
रहे संगठित हम सभी, 
एकता का दीप जलाना है।।

भूल जाए राग द्वेष को,
जाति धर्म का भेद मिटाना है। 
सत्य अहिंसा और सदाचार, 
पर चलकर हमें दिखाना है।।

विकसित भारत के निर्माण को, 
देश में नया बदलाव लाना है। 
भूल रहे जो मानवता को, 
दिशा नई  दिखलाना है।।

सारा सच  है मिटे भ्रष्टाचार  व्यभिचार,
जग में संदेश फैलाना है। 
वसुदेव कुटुंबकम देश हमारा 
 हमें विकसित भारत बनाना है।।

सर्वाधिकार सुरक्षित 

पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश।

भारत - कवयित्री राजवाला पुंढीर

भारत - कवयित्री राजवाला पुंढीर

यह देश हमारा भारत, 
है जग में न्यारा 
हम वास करें इसमें
हमको है अति प्यारा।

सोने की चिड़िया भी 
इसको सब कहते थे
कश्मीरी शोभा पै 
मरते हैं मरते थे
भारत के वासी हैं
हम में है भाईचारा
हम जिएं मरें इसमें
 हमको है अतिप्यारा।

संस्कार खजाना इसका,
हम सब की शान है
नारी लज्जा आभूषण 
नारी की शान है
यहां की सती नारी से
यमराज भी हारा
सती ने बचाए प्राण पति
बोली यम जयकारा।

इस देश की धरती मां
 उगले सोना चांदी
पर्वत हिमालय चोटी
 रोके तूफान आंधी
दीखे सावन हरियाली
बादल बरसे धारा
हम झूम- झूम नाचें
हमको है अति प्यारा।

इस भारत में बेटी
मानी जाती है देवी
नवदुर्गा पूजा में 
पुजती संग कन्या देवी
पग पड़ते हैं इनके तो
आशीष मिले सारा
यह देश की है रीति 
हमको है अति प्यारा।

प्रभु ने अवतार लिए
 उनको भी अति भाया
यहां राम- कृष्ण जन्मे
अद्भुत है प्रभु माया
रावण,कंस को प्रभु ने
भारत में ही संहारा
है देश ऋषि मुनियों का
हमको है अति प्यारा।

यहां गीता भागवत को
 सम्मान दिया जाता 
सत्संग होता है यहां पर
यहां ज्ञान दिया जाता
कहती है पुंढीर यहां
बहे प्रेम की धारा
हर जन्म मिले भारत में
हमको है अति प्यारा।

स्वरचित
कवयित्री राजवाला पुंढीर
एटा,उत्तरप्रदेश

हंगामा - अनिता शर्मा

#अंतर्राष्ट्रीय हिंदी साहित्य मंच
#हमारी वाणी
# साप्ताहिक प्रतियोगिता
#मेरी कलम मेरी पहचान

#हंगामा - अनिता शर्मा

शांति संदेश हुए सब धूमिल
    मक़सद सिर्फ हंगामा है,
बातेँ रखना चाहते जन जब
     खड़ा होता हंगामा है।।

ढेर लगते समस्याओं के जब
    बात समाधान की आती,
हल करना है समस्या को किन्तु
    भेंट हंगामे की हो जाती।।

  घर ,बाहर ,बाज़ार में देखो
      सिर्फ हंगामा दिखता है
  शादी, ब्याह,पिकनिक, पार्टी
      हंगामा मन भाता है।।

अंत समय शांति है पाना किन्तु
     शव भी चक्काजाम करवाता है
  अग्नि दाह तो होना ही है
      हंगामा पहले हो जाता है।।

       अनिता शर्मा
         देवास (मध्य प्रदेश)
          मौलिक और स्वरचित 


भारत देश - दीपिका चौहान

भारत देश - दीपिका चौहान

भारत देश केवल नक्शे की एक रेखा नहीं,
यह संस्कारों की जीवित धरोहर है।
यहाँ मिट्टी में इतिहास बोलता है,
और आँखों में भविष्य सपनों की तरह बसता है।
यहाँ गंगा की धारा में पवित्रता बहती है,
और रेगिस्तान में धैर्य की ललकार गूँजती है।
यहाँ पर्वत मजबूती से खड़े रहना सिखाते हैं,
और सागर विस्तार का सही अर्थ बताते हैं।
भाषाएँ अनेक हैं, पर भाव एक,
रूप भिन्न हैं, पर आत्मा एक।
विविधता में एकता की यही मधुर ध्वनि
भारत की सच्ची और स्थायी पहचान है।


परिचय
नाम – दीपिका चौहान
पंजाब

वीर जवान - ममता शाह

वीर जवान - ममता शाह

हम चैन से अपने घरों में बेफिकर सोते रहे
और तुम सेवा में निस दिन नित समय डटे रहे,

जीवन मृत्यु के खौफ से तुम बेखौफ होकर
बन देवदूत मानव सेवा में यमदूत से लड़ते रहे,,

सारी मानवता को आपकी इस वीरता पर नाज है 
मानव सेवा के लिए कर्तव्य पथ पर शान से अड़े रहे,

नींद थी आंखों में मगर वो सोए नहीं 
भूख थी बेशक मगर वो खाए नहीं 
बखूबी फर्ज निभाया वीरों ने  तटस्थ वो खड़े रहे,
 
धन्य हैं वो माता पिता धन्य मेरे देश की धरा है,
ऐसे ही वीर जांबाजों से ऐ मां सदा तेरी गोद सजी रहे,

अश्रुपूर्ण आंखों से देती हूं सलामी 
इस धरा के वीर सपूतों को 
युगों युगों तक आपके नाम की शमां ऐसे ही जलती रहे ।

ममता शाह 
उत्तराखण्ड 

Wednesday, 24 December 2025

पहचान - वंदना कुमारी

पहचान - वंदना कुमारी

कठिनाई से लड़ना है तुम्हें
पत्थर को भेदना हैं तुम्हें
ज़ंजीर तोड़ना हैं तुम्हें
हां अपना एक पहचान बनाना हैं तुम्हें।


कुछ मिलकर तुम्हें गिरायेंगे
कुछ मिलकर तुम्हें उठाएंगे 
लेना है अपना निर्णय तुम्हें
हां पहचान बनानी है तुम्हें

लेना है अपना सिद्धान्त तुम्हें
सागर को पार करना है तुम्हें
विश्वास अडिग रखना है तुम्हें
हां एक पहचान बनानी है तुम्हें

भारत मां का सेवा करना है तुम्हें
देश का ऋण चुकाना है तुम्हें
मां के खातिर कुर्बानी देनी है तुम्हें
हां एक पहचान बनाना हैं तुम्हें

हर नौका पार लगाना है तुम्हें
लहरों से नहीं घबराना हैं तुम्हें
आसमान में चिराग जलाना है तुम्हें
हां एक पहचान बनाना हैं तुम्हें

विघ्न बाधा से लड़ना है तुम्हें
हौसला को आगे बढ़ाना है तुम्हें
बाधा को भी चुनौती देना है तुम्हें
हां एक पहचान बनाना हैं तुम्हें

अपने कई जंग जीतने है तुम्हें
इतिहास को भी बदलना है तुम्हें
बंद किस्मत को भी जगाना है तुम्हें
हां एक पहचान बनाना हैं तुम्हें

कमजोरी को ताकत बनाना हैं तुम्हें
राह को फूल से सजाना हैं तुम्हें
विजय भारत का फहराना हैं तुम्हें
हां एक पहचान बनाना हैं तुम्हें

वंदना कुमारी
दरभंगा बिहार

पति - डॉ. रुपाली चौधरी


पति - डॉ. रुपाली चौधरी महाराष्ट्र

     यदि पत्नी घर के आंगन की शोभा हैं तो पति घर का   परिपूर्ण चबूतरा हैं। पति है तो पत्नी के शृंगार का मूल्य है उसका हर श्रृंगार पति के अस्तित्व की पहचान है । पति संतोष का वह अविरल रूप है जो नारियल की  भांति ऊपर से कठोर और अंदर से मीठा़ होता हैं। जिस प्रकार शब्द का अर्थ के साथ, धरती का आकाश के साथ, फुल का उसकी खुशबू के साथ तथा नदी का झरने के साथ एवं चांद का चांदनी के साथ अनोखा रिश्ता होता है ।  वही रिश्ता पति का पत्नी के साथ होता है। पति परिवार का आधारस्तंभ होता हैं। वह विश्वास प्रेम का अविरल स्त्रोत है। त्याग कर्तव्य के साथ आत्मीयता का संबंध रखने वाला स्थिरता का प्रतीक है। परिवार की हर जिम्मेदारियों को निभाने में वह समर्पित हो जाता हैं। परिवार की प्रति मेहनत इमानदारी और प्रेम से संपूर्ण परिवार को एकता की सूत्र मे बांधने वाला  मजबूत धागा है । पति के अस्तित्व से ही पत्नी एवं बच्चों का जीवन सुगंधित  बगियां की तरह खिल उठता है।  पति वह बरगद का वृक्ष हैं जिसकी छाया मे संपूर्ण परिवार सुखदायी फलता एवं फुलता है । पति न मात्र प्रेम का परिचायक है अपितु  वह समर्पण का पवित्र रिश्ता निभाने वाला है । वह  हरी स्थितियों का सामना कर अपने परिवार की रक्षा करता है परिवार का सच्चा मार्गदर्शक बन अपने बच्चों का पालन करता है। पत्नी के हर सपनों को साकार करने   हेतु दिन  - रात प्रयास करता है। घर की शांति मात्र पति पर आधारित है। वह  न केवल  जीवन साथी हैं अपितु  मन का सच्चा सहचर हैं । पत्नी के लिए पति केवल जीवनसाथी नहीं, बल्कि आत्मा का सखा होता है। उसका स्नेह, धैर्य और प्रेम जीवन में मधुरता घोल देते हैं। जब पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समझ का बंधन होता है, तब जीवन का हर संघर्ष सरल लगने लगता है।वास्तव में, पति वह दीपक है जो अपने परिवार के मार्ग को उज्ज्वल करता है, और उसका स्नेह ही परिवार को एक सूत्र में बाँधता है। ऐसा पति जीवन का सच्चा वरदान होता है।