महात्मा,भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का संत महान -- नन्दलाल मणि त्रिपाठी
भारत के राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी के विचारों व्यवहारो पर क्या नई पीढ़ी को पुनर्विचार करने को उद्धत है स्वतंत्रता के बाद धार्मिक उन्माद में भारत कि हानि एवं नव
राष्ट्र पाकिस्तान का निर्माण कश्मीर को विशेष दर्जा दिया जाना आदि सभी प्रश्नों के उत्तर में नई पीढ़ी महात्मा कि उच्च प्रतिष्ठा एवं उनका विरोध न कर सकने कि तत्कालीन राज नेताओं कि कमजोरी को देते है!
तो क्या बापू गाँधी महात्मा को भारत द्वारा राष्ट्र पिता का गौरव सम्मान देकर कोई भूल किया है जहाँ तक मैंने स्वतंत्रता आंदोलन से सभी साक्ष्यओ का गंभीरता पूर्वक अध्ययन किया है और निष्कर्ष यही निकलता है कि महात्मा गाँधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नेतृत्व प्रधान किया दक्षिण अफ्रीका में अप्रवासी भारतीयों कि आजादी कि लड़ाई में विजयी महात्मा आत्म विश्वास से परिपूर्ण भारत लौटने के बाद
आपस में लड़ते भीड़ते छोटी छोटी रियासतों में बंटे भारत के मौलिक समाज को दर किनार कर जन साधरण जो उपेक्षित
कमजोर एवं प्रतंत्रता कि पराकाष्ठा का शिकार था उनसे स्वतंत्रता को अधिकार के रूप में जागृत किया और छुआ छुत ऊंच नीच में भेद भाव के अंतर को समाप्त कर उन्हें संगठित किया उनमे आत्म विश्वास जगाया एवं नेतृत्व प्रदान किया जिसका मध्यम सत्य अहिंसा एवं सत्याग्रह
बनाया जिसके माध्यम से ब्रिटिश हुकूमत के आर्थिक तत्र पर प्रहार
विदेशी वस्त्रो कि होली नमक सत्याग्रह के नील खेती आदि जन जागरण किया जिससे ब्रिटिश हुकूमत के भरतीय अर्थ तंत्र कि जड़े उखाड़ने लगी साथ ही साथ आम भरतियों का उनके नेतृव में संघठित होना ब्रिटिश हुकूमत कि चूले हिला गया निर्विवाद रूप से महात्मा भारत कि स्वतंत्रता कि लड़ाई के महा नायक थे उनके द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में किए गए योग दान ही भारत कि स्वतंत्रता का सार्थक सार है!
अतः महात्मा को राष्ट्र पिता का सम्मान देकर आम भरतियों द्वारा
बापू के प्रति कृतज्ञता है निः संदेह
मोहन दास कर्म चंद्र गाँधी आम इंसान से अलग ईश्वर अंश आत्मा के महात्मा के रूप में वर्तमान एवं भविष्य में भारतीयों का प्रथ प्रकाश प्रदान करते हुए आने वाली हर पीढ़ी को दिशा दृष्टि कोण प्रदान करते रहेंगे!!
नन्दलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!

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