यमराज से नोंक-झोंक - माया मेहता
चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो
अकाल मौत द्वार पर यमराज खड़े हो
स्तब्ध तन - मन मेरा क्यूं चले आए हो
शुभ दिन है मेरा अशुभ बनाने आए क्यों।।
चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो ...........
ना संकेत ना क्रंदन उन श्वान-पंछियों के
भूल गए वृद्धा का पता मुझसे ही लिजिए
वृद्ध पड़ोसन हैं मेरी न हाड, मांस,चाम है
आज मुझे छोड़ दें उपकार उन्हीं पर कीजिए ।।
चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो ..............
क्रोधित यमराज बोले वक्त यूं बर्बाद न करें
एक नाम एक राशि मोह माया में क्यों फंसे
कर्तव्यनिष्ठ यमदूत हैं कर्म हमारा धर्म है
आपको ले जायेंगे कलयुग से मुक्ति दिलाएंगे।।
चाहे काल्पनिक हो हकीकत दृश्य हो।
बेटे के ब्याह पर अतिथियों का झुंड हैं
बोझ ज़िम्मेदारियों का आऊं कैसे छोड़ के
हाथ जोड़ विनती करूं भ्राता मुझे छोड़िए
ताप्ती-यमुना मान के भ्राता का फर्ज निभाइये।।
चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो ...........
'यम' की 'यमी' बन गई कृपा या चमत्कार से
वृद्धा की स्वांस थम गई कलयुग से वो तर गई
स्वर्ग सा माहौल है बेटे का आज ब्याह है
स्वप्न से जब जागी मैं, काश!हकीकत होता ये ।।
चाहे काल्पनिक या हकीकत दृश्य हो..................
( एक सत्य घटना पर मैं बहुत आहत हुई और मैंने काल्पनिक रुप से यमराज से नोंक-झोंक करने की कोशिश की ।)
*माया मेहता मुंबई*

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