सत्य की मशाल - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
न तलवार उठाई, न कोई हथियार,
फिर भी हिला दिया था साम्राज्य का संसार।
हाथों में सत्य था, हृदय में अहिंसा,
भारत की मिट्टी ने रचा नया इतिहास।
धोती थी सादी, मगर विचार महान,
आँखों में सपने, होंठों पर हिंदुस्तान।
चल पड़े अकेले तो कारवाँ बन गया,
एक साधारण मानव—जन-जन की आवाज़ बन गया।
“सत्य ही शक्ति है”—जीवन ने समझाया,
अहिंसा के पथ पर जन-जन को चलाया।
अन्याय के आगे झुके नहीं कभी,
सत्याग्रह से जगा दी सोई हुई सभी।
चरखे की धुन में स्वाभिमान जगाया,
स्वदेशी का दीप हर घर में जलाया।
कहा—अपने श्रम पर विश्वास करो,
अपने हाथों से भारत का विकास करो।
नफरत की आँधी में प्रेम का दीप जलाया,
टूटे हुए दिलों को मानवता से मिलाया।
धर्म अलग हों, फिर भी इंसान एक है,
यही तो भारत की आत्मा का नेक संदेश है।
त्याग था जीवन, सेवा थी साधना,
राष्ट्रप्रेम ही उनकी सच्ची आराधना।
मिट्टी से उठकर मिट्टी में मिल गए,
पर विचार उनके अमर दीप बन गए।
आज भी जब दुनिया में हिंसा छा जाती है,
जब मानवता कहीं घायल हो जाती है,
तब याद आती है वह शांत-सी पुकार—
“सत्य और अहिंसा ही हैं जीवन का आधार।”
हे बापू! तुम्हारी राह कठिन सही,
पर मानवता के लिए इससे सुंदर राह नहीं।
जब तक सत्य की लौ दिलों में जलती रहेगी,
तब तक तुम्हारी गाथा दुनिया में चलती रहेगी।
नमन उस संत को, नमन उस विचार को,
नमन भारत के उस महान संस्कार को।
जिसने सिखाया—जीतना हो संसार,
तो पहले जीत लो अपने भीतर का अंधकार।
सत्य रहे, अहिंसा रहे, मानवता का मान रहे,
भारत की पावन धरती पर सदा शांति का गान रहे।
डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab

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