Saturday, 10 October 2026

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी - डॉ. अशोक कुमार जाटव

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी - डॉ. अशोक कुमार जाटव

जब था देश पराधीन,
चारों ओर था हाहाकार,
फैल रही थी असहनीय चीत्कार,
जहाँ देखो, वहीं अत्याचार ही अत्याचार।
जुल्म ढा रहे थे फिरंगी,
क्योंकि देश था उनके अधीन,
जब राष्ट्र ने लगाई पुकार,
गांधी जी का हुआ अवतार।
किया संघर्ष, राह पकड़ी,
देश ने पकड़ी उत्कर्ष की डगर,
त्याग, तपस्या और बलिदान,
गांधी जी का रहा देश को अवदान।
राह थी सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह,
सभी संचालित रहते थे शांति से,
अंग्रेज हार मानते जाते,
गांधी जी के मार्ग से।
होली जलाई विदेशी सामानों की,
नारा था—स्वदेशी अपनाओ,
देश को स्वतंत्र कराओ,
चरखा था आधार-स्तंभ।
स्वदेशी का महत्वपूर्ण प्रकल्प,
सेवा था गांधी जी का मूलमंत्र,
नारा था—तभी आएगा प्रजातंत्र,
गांधी जी के हर कार्य ही उनकी पहचान।
राष्ट्रपिता गांधी जी हैं भारत की जान,
आज उनके कार्यों से भारत महान।

डॉ. अशोक कुमार जाटव
व्याख्याता, भोपाल, मध्यप्रदेश

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