Tuesday, 18 August 2026

भक्ति / डा अनन्तराम चौबे

 अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारी वाणी 

साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
विषय... भक्ति 
दिनांक.. 11/8/2026
नाम.. महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त जबलपुर मध्यप्रदेश 
कविता...

       भक्ति 

भक्त और भगवान के बीच 
भक्ति भावना आ गई ।

सवरी की भक्ति को देखो
जूठे बेर खिलाती गई ।

भक्त की ऐसी भक्ति भावना 
भक्त के साथ में हो गई ।

भक्ति कर लो राम नाम की
जीवन सफल हो जायेगा ।

सीताराम भजन करो
हर मुश्किल कट जायेगी ।

पत्थर की थी अहिल्याबाई
चरण के छूते तर गई भाई ।

राम नाम की ऐसी ही भक्ति
पत्थर भी पानी में तेरे भाई । 

जय श्रीराम का नाम वो लेकर 
कोई कार्य शुरू सब करते हैं ।

सिवरी की कुटिया में जाकर
जूठे बेर सिवरी के खाएं ।

श्रीराम के दर्शन पाकर ही
सिल्ली भी व्रह्मलीन हो गई 

जात पात का भेद न करते
मर्यादा में अपनी रहते ।

महाबली बजरंग बली भी
राम नाम की भक्ति करते ।

भक्ति से भगवान बने थे ।
ऐसे वो बजरंग बली थे ।

सियाराम के प्रिय भक्त थे ।
भक्ति का वो मार्ग चुने थे ।

बुद्धि विवेक दाता है
शिव अंश अवतारी है ।

राम काज में समर्पित हैं
ऐसे वो हित कारी  हैं ।

विभीषण भी राम भक्त थे
श्रीराम राम के कृपापात्र बने।

रावण की मृत्यु के बाद में
लंका के राजा भी बने ।

मीरा बाई ने भक्ति की थी 
जहर हलाहल पी गई थी ।

भगवान की भक्ति ऐसी की
जहर पीकर भी जान बची थी ।

भक्त प्रहलाद ने बचपन से ही 
भगवान की भक्ति की थी ।

अपने ही पिता से कष्ट पाए
होलिका दहन में भी जान बची थी 

ईश्वर की जो भक्ति करता 
मोक्ष भी वही पा जाता है ।

सारे दुख संकट दूर हो जाते
जीवन सफल हो जाता है ।

मां पार्वती ने शिव भक्ति करके
शिव शंकर को पति रूप में पाया ।

शिव शंकर की अर्धांगिनी बनकर 
मां जगत जननी स्वरूप पाया  ।

 महाकवि अनन्तराम चौबे अनन्त 
   जबलपुर म प्र /8354/
        11/8/2026
लंदन यू एस ए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर

गंगाजल / डॉ० उषा पाण्डेय

 गंगाजल / डॉ० उषा पाण्डेय

गंगाजल होता पवित्र, है यह अमृत समान।
गंगा जी को हम माँ कहते, उत्तम है गंगा स्नान।
भगीरथ जी गंगा जी को धरती पर लाये, भागीरथी नाम मिला।
शिव जी ने गंगा जी के प्रचंड वेग को, अपनी जटाओं में रोक दिया।
अपनी जटा से शिवजी ने, पृथ्वी पर गंगा की धार को   किया प्रवाहित।
भगीरथ जी के पूर्वजों को मुक्ति मिली, गंगा जी पृथ्वी पर बहीं संयमित।
गंगाजल कभी खराब नहीं होता, गंगाजल में ऑक्सीजन रहता बहुतायत।
गंगाजल हर हिंदू के लिए, रखता है बहुत अहमियत।
हमारी आस्था का है प्रतीक गंगा जल, हर घर मे पाया जाता।
शुभ कार्य में गंगाजल, उपयोग में लाया जाता।
'गंग सकल मुद मंगल मूला। सब सुख करनि हरनि सब सूला।' तुलसीदास जी ने बताया। 
जय जय भागीरथ नन्दिनी, मुनि-चय चकोर चन्दिनी,
विनय पत्रिका में बतलाया।
मन चंगा तो कठौती में गंगा' संत गुरु रविदास जी हमें बता गए।
साधारण जल भी गंगाजल हो जाता है, यदि उसमें दो-चार बूंद गंगाजल का पड़ता है।
गंगाजल से ही, मानव का पाप धुलता है।
गंगाजल के छिड़काव से, नकारात्मकता दूर होती, सकारात्मक उर्जा मिलती है।
मोक्षदायिनी गंगा, हमारा स्वास्थ्य ठीक रखती है। 
गंगा में हम डुबकी लगाते, शांति हम पाते।
हर हर गंगे, जय माँ गंगे, जयकारा हम सब खूब लगाते।
देवताओं का अभिषेक, गंगाजल से किया जाता।
किसी पूजा के पहले, गंगाजल से स्वयं को शुद्ध किया जाता।
गंगाजल में अनेक, औषधीय गुण होता।
गंगाजल की है विशेषता, गंगाजल कभी खराब नहीं होता।
गंगाजल शिवलिंग पर चढ़ता, करते हम गंगाजल से अभिषेक।
बुरा ख्याल न मन में आता, जागता हमारा विवेक।
गंगाजल पवित्र होता, 
इसे जमीन पर रखें नहीं।
तांबे, चांदी या कांच की शीशी में गंगाजल, ऊपर रखना है सही।
गंगाजल क्यो खराब न होता, 
कई परीक्षण किया गया।
गंगाजल में बैक्टीरियोफेज वायरस होता, हानिकारक बैक्टीरिया रहने नहीं देता,
वैज्ञानिकों ने अपने प्रयोग में पाया।
गंगाजल रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता, आयुर्वेद  है ऐसा कहता।
गंगाजल में सल्फर खूब होता, जिवाणुओं की वृद्धि रोकता।
गंगा में गंदगी पड़ती, हमें इसे रोकना होगा।
नमामि गंगे जैसे कार्यक्रमों में,
सहयोग करना होगा।
गंदगी गंगा में न डालें, बच्चों को समझाना होगा। 
गंगा स्वच्छ अविरल बहती रहे, गंगाजल का महत्व सबको बताना होगा।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'
स्वरचित
वैस्ट बंगाल 

पाकिस्तान में कितने हिन्दू? - खुशदीप सहगल

 पाकिस्तान में कितने हिन्दू? - खुशदीप सहगल


पाकिस्तान में कितने हिन्दू रहते हैं? पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी ने 14 अगस्त को अपने संबोधन में पाकिस्तान में हिन्दुओं की आबादी 3 से 4 फ़ीसदी बताई. इसे लेकर इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है...

हालांकि, पाकिस्तान सरकार की 2023 की आधिकारिक जनगणना के आंकड़े राष्ट्रपति के दावे को खारिज करते हैं. इसके अनुसार, पाकिस्तान में हिंदुओं की कुल आबादी लगभग 52 लाख है, जो देश की कुल जनसंख्या का केवल 2.17% ही है. जबकि पाकिस्तान हिन्दू पंचायत और हिन्दू काउंसिल कहती है कि ये संख्या क़रीब 80 लाख है... 

1947 में पाकिस्तान की आबादी में हिन्दुओं की हिस्सेदारी क़रीब 14.6% थी, जो 2023 की जनगणना के मुताबिक़ घटकर 2.17% रह गई... 

पाकिस्तान में 90 फ़ीसदी हिन्दू आबादी सिंध के 10 ज़िलों में रहती है. पंजाब में ढाई लाख, बलूचिस्तान में 60 हज़ार और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में तक़रीबन 6 हज़ार हिन्दू आबादी बताई जाती है...

बंटवारे के दौरान और उसके तुरंत बाद करीब 47 लाख हिंदू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आ गए थे. साल 1951 में जब पाकिस्तान में पहली बार आधिकारिक जनगणना कराई गई, तो पश्चिमी पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी सिमटकर केवल 1.6 प्रतिशत (करीब 5.3 लाख) ही रह गई थी. इसके बाद दशकों तक यह आंकड़ा बेहद कम बना रहा. 1998 की जनगणना में भी हिंदुओं की आबादी 1.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी. वर्तमान में अलग-अलग रिपोर्ट्स और हालिया गणना के मुताबिक, पाकिस्तान में हिंदुओं का प्रतिशत 1.6 से 2.17 फीसदी के आसपास बना हुआ है...

पाकिस्तान की पूरी आबादी में सिंध प्रांत का उमरकोट जिला एक अनोखा उदाहरण है. यह पाकिस्तान का एकमात्र ऐसा जिला है, जहां आज भी 52 प्रतिशत आबादी हिंदू है और वे बहुसंख्यक हैं. पूरे पाकिस्तान की बात करें तो देश में 96 से 97 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है, जिनकी संख्या करीब 24 करोड़ है. इनमें से 85 से 90 प्रतिशत सुन्नी और 10 से 15 प्रतिशत शिया मुसलमान हैं. वहीं, ईसाइयों की बात की जाए तो वे कुल आबादी का 1.37 से 1.5 प्रतिशत (लगभग 32 से 33 लाख) हैं, जो मुख्य रूप से पंजाब और सिंध प्रांत में बसे हैं...

Monday, 17 August 2026

वीरों की याद में मोहाली मे कवि सम्मेलन किया

 वीरों की याद में मोहाली मे कवि सम्मेलन किया 

सारा सच (जीरकपुर मोहाली) पंजाब: 15 अगस्त 2026  को आजादी के 80 वें पावन पर्व पर देश के वीरों की याद में *काव्य क़दम साहित्यिक संस्था हरियाणा* द्वारा होटल प्लैटिनम, ओल्ड अम्बाला रोड़ ढकौली में एक कवि सम्मेलन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि मशहूर वीर रस कवि विजेंद्र सिंह चौहान रहे। मंच संचालन आशा रानी द्वारा सफलतापूर्वक किया गया। 
कवि सम्मेलन की शुरुआत बाल कवि अयांश भगवाड़िया ने एक देश भक्ति रचना सुनाकर की। इसके बाद अध्यक्ष बलवान सिंह मानव ने देश भक्ति पर सुनाया - देश से मेरे मुझको प्यार है, ये देश ही तो मेरा श्रृंगार है- और वाहवाही लूटी।
सीमा चहल पुष्प ने नारी शक्ति की महिमा दर्शाई और माहौल में एक नया रंग भर दिया - साड़ी में सिमटी हुई नारी, सारे जमाने पे है भारी। राजीव गुप्ता ने बहुत शानदार प्रस्तुति दी - एक बार नहीं हम सौ बार मरेंगे,  देश के लिए हर बार मरेंगे - सुनाकर मन मोह लिया।
मशहूर गज़लकार अनीता नरवाल ने अपनी शानदार गज़ल यूं सुनाई- आते नहीं हैं ख़्वाब परी के जहान से, बढ़ने लगा है प्यार का खतरा निशान से- और तालियों की गड़गड़ाहट लूटी।
चंडीगढ़ से प्रसिद्ध सर्वेश शायर ने अपनी देश भक्ति इस प्रकार पेश की - आजाद भगत सिंह का हम नाम कैसे भूलें,
कैसे मिली आज़ादी परिणाम कैसे भूलें - और माहौल को देशमय बना दिया। युवा कवयित्री करिश्मा वर्मा ने अपनी शानदार प्रस्तुति इस प्रकार दी - पूर्वजों का लहू मिला माटी में,  आज़ादी नहीं मिली खैरात में। शशि गुरु ने अपनी भावुक प्रस्तुति दी - मुझसे मत पूछो कि भारत कितना महान है - सुनाकर सबको जागरूक किया। मीना जागलान ने बहुत सुंदर प्रस्तुति दी - तिरंगा जब आसमान में लहराता है, हर दिल देश भक्ति से भर जाता है।
 विश्वजीत सिंह शब्द ने देश भक्ति पर आत्मिक मंथन पेश किया - यह देश है कर्मवीरों की भूमि, भारत भाग्य विधाता! - सुनाकर सबको प्रेरित किया। शशि ज़रोडिया ने बहुत सुंदर प्रस्तुति दी - यह देश केवल धूल नहीं पूर्वजों की हुंकार है, यह फ़र्ज़ मोहब्बत रोटी और इंकलाब की धार है।
संदीप भगवाड़िया ने अपनी गज़ल यूं सुनाकर सबका दिल जीता - मेरे जख्मों की तरफ तू भी नज़र करके तो देख, है गुज़रता किस तरह तन्हा सफर करके तो देख। संचालिका आशा रानी ने अपनी शानदार प्रस्तुति इस प्रकार से दी - कागज़ पे आज़ादी और भाषणों के हार हैं, आप भी इस देश में सच पुछो तो लाचार हैं - सुनाकर वाहवाही लूटी। नीरज कुमार गुप्ता ने भी मंच पर अपनी प्रस्तुति दी।आस्था पब्लिक स्कूल अभयपुर पंचकूला से पहुंची कमलेश अध्यापिका ने भी देश भक्ति पर सुंदर संदेश दिया।
अन्य कवियों में बृजेश शर्मा स्नेही ,राजन तेजी सुदामा, राम कुमार वर्मा डॉ अनुपमा हेमा, रवि कटारिया, राकेश भट्ट ने संस्था के माध्यम से देश को एक नया संदेश दिया।
अंत में मुख्य अतिथि ने देश के 80 वें स्वतंत्रता दिवस पर शहीदों को याद करते हुए उनके बलिदान को स्मरण किया। यह बताया कि आज भी देश को भगत सिंह, सुभाष चंद्र , झांसी की रानी, बिस्मिल्लाह खां जैसे वीरों की जरूरत है। इस अवसर पर अपनी देश प्रेम पर रचना सुनाकर आम जनता में नया जोश भर दिया- रावण का संहार न होता, गर उसे अभिमान न होता।
अध्यक्ष बलवान सिंह मानव ने बताया कि - आज भी हर मां भारत माता ही है और भारत माता के बच्चे देश की सीमा पर हमारी सुरक्षा करते हैं। हमें सभी का सम्मान करना चाहिए।
अंत में संस्था ने राष्ट्र गान - जन गण मन अधिनायक गाकर देश प्रेम प्रदर्शित किया। 
कार्यक्रम में पहुंचे आम जन मानस ने भी देश भक्ति से प्रेरित कवि सम्मेलन का आनंद उठाया। भारत माता की जय, वंदे मातरम् से सारा माहौल देशमय हो गया।

सावन में सखीयों से बातें / सावन में सखीयों से बातें

 शीर्षक : *सावन में सखीयों से बातें*

विधा : कविता

अरी सखी सुन ना 
मेरे दिल का हाल। 
कैसे रहती हूँ मैं 
उनके बिना यहाँ। 
जब से आई छोड़कर 
माता-पिता के घर। 
जीना दूवर हो रहा
उनके बिना यहाँ पर।। 

लग रही आग सावन में
कैसे बुलाऊँ प्रीतम को। 
मन डोल रहा आज मेरा
उन्हें दिलमें बुलाने को। 
अब दिल की पीड़ा और 
नहीं सही जा रही सखी। 
बेहाल मुझे कर दिया है
उनकी मदहोश बातों ने।। 

बड़े व्रत उपवास करके 
इन्हीं सावन के दिनों में। 
करके सोहलय सोमवार
माँगा था शिव-पर्वती जी से। 
अरी सखी फिर आ गया 
वो ही सावन का महीना। 
कैसे बुलाऊँ फिर से उन्हें
इस बेचैनी को मिटाने।।

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई