Sunday, 4 October 2026

पोषण दिवस — आइए मिलकर खुशियाँ बाँटें

पोषण दिवस — आइए, मिलकर खुशियाँ बाँटें 🌸

इस बुधवार को बादशाहपुर आंगनवाड़ी में पोषण दिवस के अवसर पर लगभग 200 महिलाओं के लिए गुड़-चना एवं केले वितरित करने की एक छोटी-सी पहल की जा रही है।

हमारा उद्देश्य केवल भोजन बाँटना नहीं, बल्कि पोषण, स्वास्थ्य और जागरूकता का संदेश हर परिवार तक पहुँचाना है।

हमारा विश्वास है कि समाज में बदलाव हमेशा बड़ी चीज़ों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सहयोग और नेक प्रयासों से शुरू होता है। 🙏

यदि आप भी इस पहल का हिस्सा बनना चाहते हैं और गुड़-चना, केले या किसी अन्य रूप में सहयोग करना चाहते हैं, तो कृपया संपर्क करें:

आपका छोटा-सा सहयोग किसी के लिए
पोषण, सम्मान और मुस्कान का कारण बन सकता है। 

आइए, इस पोषण दिवस पर मिलकर एक ऐसा संदेश दें—
“हर महिला स्वस्थ, हर परिवार सशक्त।” 

मतदान का महत्व - उजमा तरनुम

मतदान का महत्व - उजमा तरनुम 

लोकतंत्र किसी भी देश की शासन-व्यवस्था का आधार है और मतदान लोकतंत्र को मजबूत बनाने का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। मतदान के द्वारा नागरिक अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं और देश के विकास तथा शासन की दिशा निर्धारित करने में अपनी भूमिका निभाते हैं। इसलिए मतदान केवल हमारा अधिकार ही नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण नागरिक जिम्मेदारी भी है।

भारत एक विशाल लोकतांत्रिक देश है, जहाँ प्रत्येक योग्य नागरिक को अपने मत का प्रयोग करने का अधिकार प्राप्त है। हमारा एक मत भी देश के भविष्य को प्रभावित कर सकता है। मतदान के माध्यम से नागरिक अपनी पसंद के प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं और अपनी अपेक्षाओं, समस्याओं तथा विचारों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सामने रखते हैं।

आज के समय में युवाओं की मतदान में भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। युवा देश की सबसे बड़ी शक्ति हैं। यदि युवा जागरूक होकर मतदान करें, तो वे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, विकास और सामाजिक सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत कर सकते हैं। इसलिए प्रत्येक युवा को मतदान के महत्व को समझना और चुनाव के समय अपने मताधिकार का जिम्मेदारीपूर्वक प्रयोग करना चाहिए।

मतदान करते समय जाति, धर्म, भाषा, व्यक्तिगत संबंध या किसी प्रकार के दबाव के बजाय उम्मीदवारों के कार्य, नीतियों और सार्वजनिक मुद्दों पर विचार करना आवश्यक है। एक जागरूक मतदाता सही जानकारी प्राप्त करके स्वतंत्र रूप से अपना निर्णय लेता है।

मतदान का प्रतिशत बढ़ना लोकतंत्र में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। हमें मतदान के दिन अपने मताधिकार का प्रयोग करने के साथ-साथ अपने परिवार और समाज के अन्य योग्य नागरिकों को भी मतदान के लिए जागरूक करना चाहिए।

अंततः कहा जा सकता है कि मतदान लोकतंत्र की शक्ति है और जागरूक मतदाता लोकतंत्र की नींव। हमारा एक मत केवल एक बटन दबाना नहीं, बल्कि देश के भविष्य के निर्माण में हमारी भागीदारी है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का सम्मान करते हुए निष्पक्ष, स्वतंत्र और जिम्मेदारीपूर्ण मतदान करना चाहिए।

उजमा तरनुम 
कर्नाटका 

लोकतंत्र का प्रहरी - डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई


 
लोकतंत्र का प्रहरी - डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई 

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चुनाव आयोग बने प्रहरी, लोकतंत्र की शान,
 निष्पक्षता की राह दिखाए, रखे देश का मान।
 मुख्य निर्वाचन आयुक्त की दृष्टि रहे सजग-साकार,
 हर मतदाता के अधिकारों का हो पूर्ण सत्कार।
मतदाता सूची शुद्ध रहे, हर योग्य नाम का मान,
 नामांकन की हर प्रक्रिया में हो स्पष्ट विधान।
 न धन का दबाव, न छल-कपट, न कोई धांधली,
 मत की कीमत समझे जनता—यही लोकतंत्र की लाली।
पारदर्शिता की उजली किरण हर चरण में साथ रहे,
 मतदान-कक्ष में निर्भय होकर मतदाता अपना मत दे।
 न भय किसी का, न प्रलोभन हो, न दबाव की दीवार,
 एक-एक मत में छिपा हुआ है जनादेश अपार।
आदर्श आचार-संहिता बने मर्यादा की रेखा,
 सत्ता हो या विपक्ष—नियमों का हो लेखा।
 जाति-धर्म की दीवारों से ऊपर उठे विचार,
 नीति, कर्म और जनहित पर हो मतदाता का अधिकार।
मतगणना हो निष्पक्ष, स्पष्ट, विश्वसनीय,
 हर चरण का सत्य रहे जनता के लिए दृश्यनीय।
 शंका यदि उठे कहीं, तो तथ्य बने आधार,
 विश्वास और पारदर्शिता से सुदृढ़ हो लोकतंत्र का द्वार।
न मेरा मत बिके कभी, न मेरा अधिकार झुके,
 मेरी उँगली की स्याही से भविष्य के दीप जले।
 मत केवल निशान नहीं—जनता की आवाज़ है,
हर जागरूक मतदाता ही लोकतंत्र का प्रहरी आज है।

डॉ. प्रो. वै. कस्तूरी बाई 
बेंगलूरु 
कर्नाटक

UPI भुगतान का नया दौर - डॉ.नेहा बागड़ी

UPI-भुगतान का नया दौर - डॉ.नेहा बागड़ी

न नोटों का झंझट, न सिक्कों का शोर,
एक छोटे से फोन ने बदल दिया, लेन-देन का दौर।

पहले जेब टटोलते थे, खुले पैसों के लिए,
अब एक क्लिक में काम होता, सेकंडों के लिए।

ठेले वाले भैया के पास भी, अब QR लगा है,
रिक्शे वाले से लेकर, मॉल तक यही नशा है।

सब्जी लेनी हो या, चाय का उधार,
"भैया PhonePe कर दिया" खत्म हुई  तकरार।

माँ गाँव से बेटे को, पल में पैसे भेजती है,
बेटी की फीस भरने में, अब देर नहीं लगती है।

न बैंक की लंबी लाइन, न किसी का इंतजार,
अपने ही फोन में है, अपना पूरा बाजार।

पाँच रुपए हो, या  फिर हो पाँच हजार, 
पेमेंट हो गया है , जी भईया आपका बहुत-बहुत आभार।
 
युवा हो या फिर हो बुजुर्ग,
इसका भुगतान करते है सब यूजर्स।  

गाँव-गाँव तक  पहुंचा  है, डिजिटल का  ये प्रकाश ,
भारत के लोगों को पेमेंट करने का, नया हुआ एहसास ।

ये है UPI, ये  नयी रीत है,
इसी ने दिलाई समय पर जीत। 

ये सिर्फ पैसा नहीं है, ये वक्त की पहचान है,
ये भरोसे का नाम है, ये हिंदुस्तान की शान है

UPI नहीं, ये तो अपनेपन का एहसास है,
जेब में इसे रखे हुए , भारत देश का हर शख्स  है।

डॉ.नेहा बागड़ी, भिवानी (हरियाणा) (Dr.Neha Bagri)

लोकतंत्र की स्याही - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "

लोकतंत्र की स्याही - डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा"

कलम मेरी पहचान बने,
सच की सदा आवाज़ बने,
लोकतंत्र के इस पर्व में,
हर मतदाता सरताज बने।
चुनाव नहीं बस नामांकन,
यह जनमन का अधिकार है,
हर एक मत की अपनी कीमत,
हर मत में जन-आधार है।
निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी,
निष्पक्ष रहे हर निर्णय,
आदर्श आचार संहिता बोले—
सबके लिए हो एक नियम।
न धन का लोभ, न झूठे वादे,
न भय का कोई राज रहे,
जनता अपने विवेक से चुने,
सच्चाई का ही ताज रहे।
मतदान केंद्र तक कदम बढ़ें,
उंगली पर स्याही मुस्काए,
जाति-धर्म से ऊपर उठकर,
भारत अपना मत दे पाए।
मतगणना जब निष्पक्ष होगी,
विश्वास तभी मजबूत बने,
पारदर्शिता के उजले दीपक
हर संशय को दूर करें।
धांधली की हर राह रुके,
ईमानदारी पहरेदार बने,
मुख्य निर्वाचन आयुक्त से लेकर
हर कर्मी जिम्मेदार बने।
न कोई वोट व्यर्थ हो जाए,
न कोई अधिकार छिन पाए,
लोकतंत्र की पावन धरती पर
जन-विश्वास सदा खिलखिलाए।
मेरी कलम यही लिखती है—
मत की गरिमा कम न हो,
भारत के लोकतंत्र की लौ
कभी किसी मौसम में नम न हो।
स्याही छोटी-सी उंगली पर,
अधिकार बहुत महान,
एक-एक मत से बनता है
भारत का भविष्य और विधान।
मेरी कलम मेरी पहचान,
मेरा मत मेरी आवाज़—
जागरूक मतदाता ही रखता,
लोकतंत्र का मान-सम्मान।

डॉ अनुपमा वर्मा "हेमा "
Punjab