Saturday, 26 September 2026

नीरव नभ में चाँद खिला - निवेदिता शुक्ला

नीरव नभ में चाँद खिला -  निवेदिता शुक्ला

नीरव नभ में चाँद खिला 
झरती रजनी उजियारी ,
वन पथ पर चुपचाप चली 
जैसे सपनों की सुकुमारी ।

मंद पवन ने चुरा लिया 
फूलों के अधरों का मधुर गान ,
ओस कणों में मुस्काया फिर 
भोर का कोमल अरुणिम प्राण ।

दूर क्षितिज के पार कहीं 
मन का दीपक जलता है,
अनजाने किसी मधुर मिलन को 
हृदय निरंतर चलता है।

कौन पुकारे नीरवता में 
ये कौन छुए मन के सुप्त तार ,
चांँद उतर कर पूछ रहा 
किसका है ये मधुर इंतज़ार?

निवेदिता शुक्ला
इटावा, उत्तर प्रदेश

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