Saturday, 10 October 2026

बेजान लोकशाही - डॉ केजे गढ़वी

बेजान लोकशाही - डॉ केजे गढ़वी

व्यर्थ गया बापू आपका बलिदान।।

हार गया संत और जीत गए शैतान।।

काले के कर्म गोरों से भी हो गए काले।

गली गली में गोडसे, गांव गांव हैवान।।

अंग्रेजी औलाद से कैसे होंगे आजाद।

गद्दारों की चुंगल में फंसा हिंदुस्तान।।

 आंगन में आग, बस्ती जैसे जलियांवाला बाग।

आंखों ने अंगारा,वतन बना रेगिस्तान ।।

अहिंसा बेमिसाल,लकड़ी को तोप झुकी थी।

भागे गोरे  उठाई झोली,यह फकीरी पहचान।।

हर होठों पर झूठ,चारों ओर मची है लुमलुंट।

हर आंखों ने खौफ,जहरीली हर जुबान।।

मां भारती कराहे, उसे कौन दिखाए राहें,।

लोकशाही भरे आहे निकल जाएगी जान। ।


,,,,,,,,,,, डॉ केजे गढ़वी 

द्वारका, गुजरात

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