Tuesday, 3 November 2026

सुरक्षा - संजय वर्मा "दृष्टि "

सुरक्षा - संजय वर्मा "दृष्टि "

डरी -डरी सी दहशत से भरी जिन्दगी
पग -पग पर  भय से भरी जिन्दगी
मुड -मुड सी पलट से  भरी जिन्दगी
सूनी राहों पर दबोची जा रही जिन्दगी।

हैवानियत  से सनी जा रही जिन्दगी
हर चौराहों पर अब चीख रही जिन्दगी
चीखों को रोकों जरा, हैरान है जिन्दगी
दुष्कर्मियों पर कसों फंदा रो रही जिन्दगी।

रेप पीड़ित की सिसकती रही जिन्दगी
सुरक्षा की मदद सबसे मांग रही जिन्दगी
कलयुग भी हैरान देख ये दुःख भरी जिन्दगी
गुहार किससे करे ढूंढ़ रही आंसू भरी जिन्दगी।

स्तब्ध है सारी दुनिया देख लाचार भरी जिन्दगी
बेटियों की ये दशा कहा गई सुरक्षा भरी जिन्दगी

फांसी की सजा मिले ये इंतजार कर रही जिन्दगी

बिना भय के रहे लड़कियां ,दुआ मांग रही जिंदगी। 

संजय वर्मा "दृष्टि 

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