खुश रहना सीखो - जय जिनेंद्र
विधा : कविता
तेरा मेरा जो साथ है।
नई सुबह का इंतजार है।
खुशियाँ भी अपरंपार है।
इसलिए हमें तुमसे प्यार है।।
चिंता से चिंतन का सफर है।
इसलिए शरीर शिथिल है।
देखकर सोचकर समझो।
दुख में खुश रहना सीखो।।
आज कल के चक्कर में।
कल से प्रेम करते हो।
अरे कल को छोड़ो।
आज में जीना सीखो।।
भरोसा नही है खुद पर।
तो औरों का इंतजार क्यों।
परिश्रम खुद करके देखो।
फल की चिंता को छोड़ो ।।
जीने की कला को सीखो।
उदासी में खुशियाँ खोजो।
सफलता मिलेगी तुम्हें निश्चित।
पर पहले खुश रहना सीखो।।
जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई

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