हाय! ये मुसीबत फिर लौट आई है - दीपिका पाल
UPI के चार्ज ने क्या महंगाई बढ़ाई हैं..
पहले हम तो बस UPI -UPI करते थे
अब तो पैसे निकालने पर चार्ज है इसके लिए डरते है...
देश में इन दिनों UPI चार्ज को लेकर मामला गर्म है। सरकार के ऐलान के बाद आम आदमी वर्ग से लेकर व्यापारियों में खासी नाराज़गी का माहौल है। होना भी तय है, सरकार ने 2000 रूपये के पेमेंट पर निर्धारित चार्ज लगाकर बड़ा झटका दिया है वहीं इसके पीछे एक तर्क भी दिया है। सरकार ने इस साहसी कदम को सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता खत्म करने और देश में नवाचार को बढ़ाने का रास्ता बताया है।
जाहिर सी बात है, इस पेमेंट शुल्क से गुस्सा तो होगा ही, पहले जहां हम छोटे से बड़े खर्चे में बस फोन उठाकर UPI कर लेते थे लेकिन अब ज्यादा भुगतान का शुल्क भी देना पड़ेगा।
सरकार समय - समय पर बदलाव करती है ये तो जानते है लेकिन इस कदम से एक बात तो समझ आई है नगद पैसे पास में होना जरूरी है UPI जैसी आसान सुविधा भी धोखा दे सकती है।
अभी तो सिर्फ सरकार ने बस 2000रु के पेमेंट पर शुल्क लगाने की बात की है क्या पता आने वाले समय में नए नियम जोड़ न दे जिसका ख़ामियाजा दैनिक जीवन में उठाना पड़े।
तो अंत में एक मुहावरा याद आता है, ध्यान से सुनिएगा...
रामचंद्र कह गए सिया से, ऐसा कलयुग आएगा,
हंस चुगेगा दाना दुनका, कौवा मोती खाएगा।
यानी यहां कलयुग की बात है भाई.. जैसे UPI के आने से जनता के बीच में हाहाकार मच गया वही अब इसका अगला कदम क्या होगा और असर, ये सब सरकार के दिमाग पर निर्भर है।
दीपिका पाल
मध्य प्रदेश

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