Wednesday, 26 November 2025

आजादी - संजय वर्मा"दॄष्टि"


आजादी - संजय वर्मा"दॄष्टि"खुली 

सांसों में जीने वालों
आजादी का मतलब समझो
आजादी दिलाने वाले
शहीदों को करों नमन
ऐ मेरे वतन ऐ मेरे वतन।

नन्हे बच्चे आँखों मे आंसू भरे
राह तक रहे कब से पापा के आने की
घर परिवार को चिंता पास बुलाने की
मृत शरीर मे कैसे ढूंढे अपनों की तस्वीर
ऐ मेरे वतन ऐ मेरे वतन।

अपने देश मे करेंगे विकास
अब कोई नही जाएगा 
कमाने को विदेश 
आतंकियों को करेंगे खत्म
ये फैसला अब दिखा देंगे जमाने को
ऐ मेरे वतन ऐ मेरे वतन।

जिंदगी इतनी सस्ती नही होती
सदिया बीत जाती नाम कमाने को 
युद्ध से खत्म करो आतंकियों को
और अब तो कर दो बेहाल 
मेरे भारत माता के लाल 
ऐ मेरे वतन ऐ मेरे वतन।

संजय वर्मा"दॄष्टि"
मनावर जिला धार मप्र

नियम - सागर सिंह भूरिया

                                                                            नियम - सागर सिंह भूरिया

       नियम हमेशा दुनिया के भले के लिये बनाये जाते है। जिनका सभी को पालन करना होता है। नियम के अनुसार ही ईश्वर ने सारी सृष्टि का सृजन किया है। 
        ये सारा सच है कि जब इन्सान अपने चन्द फायदे के लिए कुदरत के बनाए हुए नियमों का उलंघन करता है तब कुदरत वो भयानक सज़ा देती है जिसका परिणाम सारी दुनिया को भुगतना पड़ता है।
        ये सबके सामने सारा सच है कि इस बार हिमाचल,उत्तराखण्ड,जम्मू-कश्मीर तथा कई अन्य जगहों में भीषण तुफान,पहाड़ों में भूस्खलन, कहीं आसमान से अचानक बादल फटने की भयानक घटनाएं हुई। जिसके कारण हजारों लोगों के जान-माल का नुकसान हुआ। जिससे कई निर्दोष जानें चली गई। 
        इसके लिए इन्सान खुद दोषी है। कहीं पहाड़ों के नीचे से सूरगें निकाली जा रही है। बेवजह जमीन की खुदाई करके इसे खोखला किया जा रहा है।  दुसरी तरफ दुनिया में हथियारों की होड़ मची है। ढेरों विस्फोट कीये जा रहे हैं। जिससे धरती का भीतर से तापमान बढ़ रहा है। जो कुदरत के नियमों के खिलाफ है।
      हमें उक्त घटनाओं से सबक लेते हुए अपनी कार्यशैली में सुधार करने की बहुत जरूरत है।
       इसलिए आओ हम सब अपना फर्ज समझकर ईमानदारी के साथ प्रत्येक नियमों का पालन करें चाहे वो ईश्वर के बनाए हो या इन्सान के द्वारा बनाए गए हो। 
          
                          सागर सिंह भूरिया,
                     बैजनाथ, कांगड़ा, (हिमाचल प्रदेश)

Monday, 24 November 2025

मुस्कुराते रहो - नीलम गुप्ता

मुस्कुराते रहो - नीलम गुप्ता

माना गम हजारों है यारों
पर खुलासा क्यों ही करें
सताया तो बहुत है जिंदगी ने
पर अब तमाशा क्यों ही करें

उतार ,चढ़ाव बहुत आए मगर
रोते रहने का ढोंग क्यों ही करें
होगी जिंदगी हम पर कितनी भी हावी
मुस्कुरा कर उसका स्वागत क्यों ना करे

कोई साथ बेशक ना दे मेरा
हम ख़ुद के साथ सदा खड़े रहें
चार लोग हंसते है तो हंसने दे
उन चारों की परवाह हम क्यों करें

हां ,बेशक कामयाब ना हुए हम
जश्न में कोई कमी हम क्यों करें
माना अख़बार में फ़ोटो नहीं छपती मेरी
खुद की तस्वीर पर नाज़ क्यों ना करें

माना मेरा चाहा नहीं हुआ पूरा यारों
जो मिला उसका शुक्रिया अदा करें
कुछ काश तो रह ही जाते जिंदगी में
इन काश को हावी हम क्यों ही करे

मुस्कुराते चेहरे लुभाते है सभी को
तो हम भी एक मुस्कान क्यों ना धरे
हां, नहीं है  हम कोई महान हस्ती यारों
पर खुद की मस्ती में कमी क्यों ही करें

स्वरचित ✍️
नीलम गुप्ता 
उत्तर प्रदेश 

सफलता - सुधा बसोर सौम्या

हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता 
मेरी कलम मेरी पहचान 
विषय - सफलता 
सादर प्रेषित 

सदा आगे  ही बढ़ो संघर्ष जीवन में करो 
बाधाएं कितनी भी आऍं मत उनसे डरो।

पुष्पों से सुरभित नहीं सफलता की राह
भूल जाओ यदि हो मन में ऐसी कोई चाह।

कंटक पथ पर चलते यदि तुम जाओगे 
साहस के फूल बिछा सफलता पाओगे।

सफलता मिलना है नहीं तनिक भी आसान 
 दुनिया के षडयंत्रों को भी तुम लो पहचान।

मंजिल तुमसे कितनी भी हो दूर मगर 
पाओगे निश्चित ही रखोगे हौंसला अगर।

सफल आप जब हो जाओगे 
मन में फूले  नहीं समाओगे।

 पर सफलता तुमको मिलते ही
मन उपवन तुम्हारा  खिलते ही।

 तुम्हें तुम्हारी सफलता के राज बताए जाऍंगे 
षड्यंत्रों  में उलझा असफल  लोग खुशी मनाऍंगे।

मत घबराना मत रुकना तुम
 कभी बदल भी  मत जाना ‌तुम।

हे कर्मवीर हे धर्मवीर जीवन में होकर सफल 
  गर्वित हो जिओ जीवन रख इरादे अपने अटल।
                  
सुधा बसोर सौम्या 
                   उत्तर प्रदेश 

गम - राजवाला पुँढीर

 

गम - राजवाला पुँढीर

जिंदगी में है गम,सुनलो हमरे सनम
दूरियां बढ़ गयीं, ऐसे हालात थे।
दिल्लगी में सनम,हुआ हमको भरम
तालियां बज गयीं,ऐसे हालात थे।।

जो ना सोचा कभी आज वो होगया
क्या भाग्य हमारा आज ही सोगया?
खामियाँ दिख गयीं ऐसे ख्यालात थे।

नींद में भी हमें झटके आने लगे
भीड़ में भी हमें वो बेगाने लगे
चिट्ठियां फटगयीं ऐसे अवसाद थे।

प्यार के बदले में हमको गम मिला
जोति के बदले में हमको तम मिला
बोलियां चुभ गयीं ऐसे सवालात थे।

कभी होती खुशी कभी होता है गम
कभी दिखती किरण कभी होता है तम
ये अँखियाँ रोगयीं ऐसे जज्बात थे।

कोई भी अपना तो नहीं लगता हमें
कोई भी सपना तो नहीं दिखता हमें
गालियाँ मिल रहीं ऐसे हवालात थे।

हम भी टूटने लगे गम इतना मिला
अब तो भूलने लगे हम शिकवा गिला
डोरियां कट गयीं ऐसे आलात थे।

ऐसा लगता हमें सब चिढ़ाने लगे
अपने खुशियों भरे पल दिखाने लगे
ये अँखियाँ भी झुक गयीं बकवाद थे 
  
जिंदगी मर गयी हम भी मुरझा गये
वंदिगी जुड़ गयी हम भी भगवा भये
कापियाँ लिख गयीं ऐसे आघात थे।

अजनबी हम तो बनगये अपनों केलिए
 चमकती शान बनगये गैरों केलिए
डालियां झुक गयीं ऐसे बरसात थे।

लिखती पुँढीर है जिंदगी का सफर
बँधती न धीर है बाँध टूटा सबर
बादिया लिख गयीं ऐसे सौगात थे।

स्वरचित
कवयित्री राजवाला पुँढीर
उत्तर प्रदेश