Monday, 21 September 2026

फ़र्ज़ राखी का - बलवान सिंह मानव

फ़र्ज़ राखी का - बलवान सिंह मानव


बहना ने बांधा है प्यार, भाई की कलाई में, 
करेगा रक्षा ये वादा, मांग है भाई से, 
क्यों, क्या करेगा रक्षा ?, अपनी इस बहन की,
दिलाएगा मुक्ति उस पीड़ा से, जो हमने है सहन की?
निभा दे अपना फ़र्ज़ भाई, अब ना किसी से डर, 
कर सामना इस दरिन्दों का, तू भी तो अब कुछ कर,
आखिर नोचते रहेंगे कब तक, हमें यूं ही ये भेड़िये, 
भाई पिता, चाचा, मामा, मौसा, सबकी खाल में छुपे भेड़िये,
ना औकात रही अब कुछ , हमें बार -2 ये नोचते हैं,
दिखाकर हैवानियत अपनी, खून से हाथ पोंछते हैं,
क्या होगा अब इस देश का, क्या होगी सुरक्षित हमारी जाति?
क्या होंगे अत्याचार बंद?,  जो हो रहे हम पर काफी,
सुनकर खून खौल उठा भाई का, मैं यह नहीं होने दूंगा, 
इस दरिन्दों को अब मैं , खून से हाथ धोने नहीं दूंगा, 
मैं लगा दूंगा पूरा जीवन, तुम बहनों की देखभाल में, 
नहीं चैन से बैठने दूंगा, जो भेड़िए छिपे हमारी खाल में, 
पर तुम बहनें भी अब, कम करो पाश्चात्य का दिखावा, 
शील - मर्यादा पर करो मनन, छोड़ दो नया पहनावा, 
सुनकर भाई की बात, बहना ने भी मन में बांधी,
"मानव " ने स्वीकारा फ़र्ज़, बहना ने भी राखी बांधी।।

       मौलिक एवं स्वलिखित रचना
       बलवान सिंह मानव

‌मीडिया - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

‌मीडिया - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 

'मीडिया' शब्द अंग्रेजी शब्द मीडियम का बहुवचन है, जिसका अर्थ है माध्यम।
खबरों के आदान-प्रदान का है मीडिया एक माध्यम।
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है।
मीडिया हमारी जानकारी बढ़ाता, हमारे  व्यक्तित्व में निखार लाता है।
तीन प्रकार की मीडिया होती है प्रिंट, 
इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल।
मीडिया हमारी जिज्ञासा शांत करता है, खबरों की जानकारी देता पल-पल।
प्रिंट मीडिया में कागज पर छपी सामग्री हमें मिलती है।
किताबें और पत्रिकाएं बहुत लाभदायक होतीं, हमारा सही मार्गदर्शन करती हैं।
इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेडियो, टेलीविजन, विश्व की
खबरें हमें बताता है।
विश्व में घट रही घटनाओं को, हमें घर बैठे दिखलाता है।
डिजिटल मीडिया की बात अलग है, फेसबुक, व्हाट्सएप इंस्टाग्राम, वेबसाइट, पॉडकास्ट हमें दुनिया के किसी भी कोने तक पहुंचाता है।
मीडिया हमें आसपास की और दूर की खबरों से अवगत कराता है।
मीडिया मानो दूरियाँ खत्म कर देता, परिवार के सदस्यों,  दोस्तों को यह जोड़ पाता है।
हमारा दिल उदास हो, मीडिया करता है हमारा मनोरंजन।
तनाव कम करने का, मीडिया एक है बहुत अच्छा साधन।
मीडिया के लिए जो खबरें लाते हैं,
वे हैं पत्रकार।
जान जोखिम में डालकर, लाते समाचार। 
ताजा खबर हम तक पहुँचाते, विश्व का हमको मिलता ज्ञान। 
लोगों को जागृत करते, करते खतरों से सावधान।
खबर इकट्ठा करते, निष्पक्ष होकर करते काम। 
समाचार जन-जन तक पहुँचाते, करते नहीं आराम। 
निर्भीक होकर करते काम।
कमज़ोर की आवाज बनते, मेहनत कर देते काम को अंजाम।
कितनी तकलीफ सहकर  खबरें लाते, फिर भी चेहरे पर मुस्कान रहती है।
सच्चाई सामने लाकर, इनको खुशी मिलती है।
ये पत्रकार ही हैं जो हम सबको जोड़े रखते हैं‌।
समाज के हित के लिए वे सदा समर्पित
रहते हैं।
चुनौतियों का सामना करते, देते हर पहलू पर ध्यान।
समाज की उन्नति में, होता इनका बहुत योगदान।
मीडिया पर हमें भरोसा करना चाहिए, उसका साथ देना चाहिए।
सही खबर पहुंचाने में, हमें मीडिया की मदद करनी चाहिए।

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 
वैस्ट बंगाल 

पत्रकार - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी साहित्य मंच हमारीवाणी साप्ताहिक प्रतियोगिता हेतु 
विषय... पत्रकार - महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त 

कविता... पत्रकार 

पत्रकार पत्रकारिता करता
सच्ची खबर को सामने लाता ।
सारा सच अन्याय जहां भी होता है 
उसके खिलाफ आवाज उठाता ।

सरकार चलाने स्तंभ तीन है
चौथा स्तंभ पत्रकारिता भी है।
मीडिया सरकार का हिस्सा नहीं है
फिर भी पत्रकार की भूमिका है ।

आम जनता को न्याय मिले न
तब मीडिया ही न्याय दिलाती है।
न्यायपालिका हो विधायिका हो
कार्यपालिका की पोल खोलती है ।

सच्चाई पर से जब पर्दा उठता है
दूध का दूध पानी का पानी होता है ।
भ्रष्टाचार हुआ हो चाहे या फिर
जिससे जो भी काम गलत होता है ।

सारा सच सच्चाई , भ्रष्टाचार से पर्दा
उठाने में पत्रकारिता का रोल होता है।
सच्चाई जब सबके सामने आती है
सच और झूठ का भेद खुलता है ।

ऐसे ही काले कार नामों को
मीडिया के माध्यम से खुलते हैं ।
कितना भी ताकतवर हो व्यक्ति
या सत्ता की कुर्सी पर रहते हैं ।

झूठ छुपाकर बच नहीं पाते
सच्चाई को हरा नहीं पाते हैं।
मीडिया ने जब पोल खोल दी
उसको कोई छुपा नहीं पाते हैं ।


प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रानिक मीडिया
अब सोसल मीडिया भी आया है ।
यही मीडिया के ही स्तंभ तीन है
पत्रकारिता से हर कोई घबराया है।

हर गली मोहल्ला गांव शहर देश
में भी मीडिया ने जाल फैलाया है ।
मीडिया के जाल में फसा जो भी है
पत्रकारिता ने न्याय दिलवाया है।

मीडिया की भूमिका से बचा न कोई
सभी जगह में जाल फैला रहता है ।
पेपर , टी वी या सोसल मीडिया हो
इनसे ब्रेकिंग न्यूज मिलता रहता है ।

आरक्षण एस सी एस टी एक्ट 
यूजीसी कानून यूजीसी शुरू हुआ है।
तभी से सवर्णों  की नाराज़गी है
और आन्दोलन  भी शुरू हुआ है ।

सोशल मीडिया के पत्रकारों की 
पूरे देश में ही खबर चल रही है ।
दिल्ली के जंतर मंतर की खबरें 
फेसबुक वाट्सएप में चल रही हैं।

सरकार और सुप्रीम कोर्ट तक 
सोशल मीडिया की खबरें पहुंची है ।
थानों में जो एफ आई आर हो रही है
सोशल मीडिया से पुष्टि हो रही है ।

सारा सच न्यूज़ चैनलों पर रोक लगी है
आन्दोलन की खबर नहीं दिखाते ।
सरकार से सभी भयभीत हैं और 
सभी चुप्पी साधे ही रहते हैं। ।

आरक्षण एस सी एस टी एक्ट 
यूजीसी कानून नहीं हटता है ।
तो अगले चुनाव में जनता ही 
सारा सच सत्ता से इनको हटा देगी ।

   महाकवि डा अनन्तराम चौबे अनन्त
        जबलपुर म प्र

खुश रहना सीखो - जय जिनेंद्र

खुश रहना सीखो - जय जिनेंद्र
विधा : कविता

तेरा मेरा जो साथ है। 
नई सुबह का इंतजार है। 
खुशियाँ भी अपरंपार है। 
इसलिए हमें तुमसे प्यार है।। 

चिंता से चिंतन का सफर है। 
इसलिए शरीर शिथिल है। 
देखकर सोचकर समझो। 
दुख में खुश रहना सीखो।। 

आज कल के चक्कर में। 
कल से प्रेम करते हो। 
अरे कल को छोड़ो। 
आज में जीना सीखो।। 

भरोसा नही है खुद पर। 
तो औरों का इंतजार क्यों। 
परिश्रम खुद करके देखो। 
फल की चिंता को छोड़ो ।। 

जीने की कला को सीखो। 
उदासी में खुशियाँ खोजो। 
सफलता मिलेगी तुम्हें निश्चित। 
पर पहले खुश रहना सीखो।। 

जय जिनेंद्र
संजय जैन "बीना" मुंबई

राखी - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी'

 राखी - डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 
असुरों का पलड़ा था भारी, जब हो रहा था देवासुर संग्राम। 
देवराज इंद्र ने देवगुरु
वृहस्पति से पूछा, कैसे होगी जीत अपनी, कैसे बनेगा अपना काम। 
इंद्र पत्नी इंद्राणी (शची) ने
रक्षा धागा, देवराज इंद्र की कलाई पर बांध दिया।
सावन पूर्णिमा का दिन था वह, जीत हुई इंद्र की, अपना सिंहासन उन्होंने वापस पा लिया।
विश्वास था, इसी धागे ने दिलाई जीत।
सावन पूर्णिमा के दिन, रक्षा बांधने की है रीत।
त्रेता युग में प्रभु ने, लिया वामन अवतार।
कश्यप जी-अदिति जी के पुत्र, पहुंचे बलि के द्वार।
तीन पग भूमि माँगी, दान स्वरूप।
सहर्ष तैयार हो गए बलि, नीति के अनुरूप।
एक पग में धरती मापी, दूसरे पग से अंबर।
तीसरा पग हेतु बलि निज सर झुका दिये, जोड़े दोनों कर।
खुश हुए प्रभु, दिया बलि को  पाताल लोक का राज्य।
बलि के कहने से,
प्रभु बन गए पाताल लोक के द्वारपाल। 
देवी लक्ष्मी जी,
बलि के पास आईं।
रक्षा बांधी बलि के हाथ, उपहार स्वरूप पति को वापस लाईं।
जब सुदर्शन चक्र से कान्हा की उंगली चोटिल हुई, अपना पल्लू फाड़ द्रौपदी ने कृष्ण की उंगली पर बांध दिया।
कृष्ण हुए भावुक, द्रौपदी को बहन माना, संकट में रक्षा करने का वचन दिया। 
भरी सभा में जब चीर हरण हुआ, द्रौपदी ने कृष्ण को पुकार लिया। 
कृष्ण ने चीर बढ़ाकर द्रौपदी की लाज बचाई, अपना वचन पूरा किया।
चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने, संकट में हुमायूं को राखी भेजी। 
मान रखा हुमायूं ने राखी की, कर्णावती की मदद को अपनी सेना भेजी।
कहते हैं सिकंदर की पत्नी रोक्साना ने पोरस को राखी भेजी, सिकंदर को नुकसान न पहुंचने का किया मनुहार।
पोरस ने राखी का मान रखा, नहीं किया सिकंदर पर वार।
भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक राखी का त्योहार, भारत में धूमधाम से मनाते  हैं।
भाई-बहन चाहे जितनी दूर रहें, राखी का त्यौहार  मिलकर ही मनाते हैं।
बहन रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई से थाली सजाती, भाई को टीका करती।
भाई की आरती उतारती, भाई के हाथ राखी बांधती।
अपने हाथ से मिठाई खिला, भाई का मुंह मीठा करती।
भाई की लंबी आयु की प्रार्थना, बहन ईश्वर से करती।
भाई राखी बंधवाता, बहन को देता उपहार।
भाई बहन की रक्षा करने का संकल्प लेता, ईश्वर से प्रार्थना करता, बहन का सुखी रहे संसार।
ये त्यौहार ही हैं जो हमको जोड़े रहते हैं।
ये त्योहार ही हमारी संस्कृति को संभाल कर रखते हैं।
अपनों को करीब रखते, हमारे ये त्योहार।
अपने अगर संग है तो हर दिन है त्यौहार। 

डॉ० उषा पाण्डेय 'शुभांगी' 
स्वरचित
West bangal